
सोच, संवेदना और सृजन


एकलव्य बॉक्स में कला आधारित ऐक्टिविटीज़ हैं,
जिन्हें कलाकसरत® कहा जाता है।
ये कलाकसरत बच्चों में खुद टटोलकर
और जाँचकर सीखने की गुंजाइश बनाती हैं।
इसके विचारपूर्वक गढ़े गए सीमित निर्देश बच्चों को
खोजबीन के ज़्यादा अवसर देते हैं।
जो कुछ वह बनाता है, वह उसके अपने ध्यान,
अपनी कल्पना और अपने धैर्य से रचा होता है।
इस प्रक्रिया में बच्चा नई चीज़ें आज़माना
और अपने फैसले खुद लेना सीखता है,
जो उसे धीरे-धीरे आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनाता है।





एकलव्य का औचित्य
आज बच्चों के पास जानकारी बहुत है। लेकिन जानकारी होना और समझ बनना, दोनों एक जैसी बात नहीं हैं।
आने वाले समय में बच्चे को केवल याद रखना काफी नहीं होगा।
उसे देखना होगा। समझना होगा। नया रास्ता निकालना होगा।
और कई बार बिना तैयार जवाब के आगे बढ़ना सीखना होगा।
इसीलिए आज ऐसे अभ्यास की ज़रूरत है जो बच्चे को भीतर से मजबूत करे। जो उसे केवल निर्देश मानने वाला न बनाए।
बल्कि देखने वाला, सोचने वाला और अपने बल पर कोशिश करने वाला बनाए।
हम चाहेंगे कि बच्चा बदलाव से न डरे, गलती से घबराए नहीं, अपनी कोशिश पर टीका रहे , अपने विचार पर भरोसा करे, धीरे-धीरे आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बने।
यही एकलव्य का उद्देश्य है।